तीन तलाक बिल पर मोदी सरकार ने लिए ऐतिहासिक फैसला, ओवैसी समेत देशभर के वामपंथियों में मची खलबली

तीन तलाक को लेकर लम्बे समय से लड़ाई चल रही है. इसके लिए कभी कोई कड़ा कानून नहीं बनाया गया. ना ही पर्सनल बोर्ड ने इसके खिलाफ कभी कोई कदम नहीं उठाया आये दिन लिपिस्टिक नेलपॉलिश को लेकर फतवे आते रहते हैं लेकिन तीन तलाक पर चुप्पी साध लेते हैं. तो वहीँ आज फिर लोकसभा में तीन तलाक पर बिल पास हो गया.

अभी मिल रही बड़ी खबर के मुताबिक लोकसभा में तीन तलाक बिल पारित हो गया है। गुरुवार को सदन में बिल पर चर्चा के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच जबरदस्त घमासान हुआ और शाम को इससे जुड़े संशोधन प्रस्तावों पर वोटिंग हुई। वोटिंग में इसके पक्ष में 245 और विरोध में 11 वोट पड़े.

एआईएमआईएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के सभी संशोधन प्रस्ताव खारिज हो गए। वोटिंग के समय हालांकि कांग्रेस और एआईएडीएम ने लोकसभा से वॉकआउट कर दिया। चर्चा के दौरान कांग्रेस, टीएमसी समेत कई विपक्षी दल तीन तलाक बिल को ज्वॉइंट सेलेक्ट कमिटी के पास भेजने की मांग पर अड़े रहे। लोकसभा में तीन तलाक बिल को पास कराने के लिए बीजेपी ने पहले ही अपने सांसदों को व्हीप जारी कर सदन में उपस्थित होने को कहा था.

लोकसभा में मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि महिलाओं के नाम पर लाया गया यह बिल समाज को जोड़ने का नहीं समाज को तोड़ने का बिल है। उन्होंने कहा कि यह समानता के अधिकार और इस्लाम के भी खिलाफ है। खड़गे ने कहा कि धर्म के नाम पर यह बिल भेदभाव करता है और धार्मिक आजादी के खिलाफ है। खड़गे ने कहा कि संविधान के मूल्य आधार के खिलाफ सरकार कोई भी कानून नहीं बना सकती है.

मुस्लिम समाज में एक बार में तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) पर रोक लगाने के उद्देश्य से लाये गए ‘मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक को महिलाओं के न्याय एवं सम्मान का विषय करार देते हुए सरकार ने कहा कि इसे राजनीति के तराजू पर तौलने की बजाय इंसाफ के तराजू पर तौलते हुए पूरे संसद को सर्व सम्मति में इसे पारित करना चाहिए।

केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने विधेयक को चर्चा के लिए रखते हुए इसके बारे में कहा कहा कि उच्चतम न्यायालय द्वारा तीन तलाक असंवैधानिक घोषित करने की पृष्ठभूमि में यह विधेयक लाया गया है। जनवरी 2017 के बाद से तीन तलाक के 417 वाकये सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि पत्नी ने काली रोटी बना दी, पत्नी मोटी हो.. ऐसे मामलों में भी तीन तलाक दिये गए हैं। प्रसाद ने कहा कि 20 से अधिक इस्लामी मुल्कों में तीन तलाक नहीं है.

मंत्री ने कहा कि संसद ने दहेज के खिलाफ कानून बनाया, घरेलू हिंसा के खिलाफ कानून बनाया, महिलाओं पर अत्याचार रोकने के लिये कानून बनाया । तब यह संसद तीन तलाक के खिलाफ एक स्वर में क्यों नहीं बोल सकती? रविशंकर प्रसाद ने कहा , ” इस पूरे मामले को सियासत की तराजू पर नहीं तौलना चाहिए, इस विषय को इंसाफ के तराजू पर तौलना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस बारे में कोई सुझाव है तो बताये… लेकिन सवाल यह है कि क्या राजनीतिक कारणों से तील तलाक पीड़ित महिलाओं को न्याय नहीं मिलेगा । उन्होंने कि यह नारी सम्मान एवं न्याय से जुड़ा है और संसद को एक स्वर में इसे पारित करना चाहिए.

भाजपा की मीनाक्षी लेखी ने विधेयक को नरेंद्र मोदी सरकार का ऐतिहासिक कदम करार देते हुए कहा कि तीन तलाक को उच्चतम न्यायालय ने असंवैधानिक बताया और इस प्रथा का कुरान में कहीं उल्लेख नहीं है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की तुष्टीकरण की राजनीति के कारण यह प्रथा अब तक चलती आई है जिसका खामियाजा मुस्लिम महिलाओं को भुगतना पड़ा है। भाजपा सांसद ने कहा कि कई इस्लामी देशों में तीन तलाक में खत्म किया जा चुका है, लेकिन भारत जैसे धर्मनिरपेक्ष देश में चल रहा है। मीनाक्षी लेखी ने कहा कि अगर कांग्रेस ने 30 साल पहले कदम उठाती तो उसी वक्त इतिहास बदल जाता। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार में महिलाओं के लिए कई कदम उठाए हैं और यह भी मुस्लिम महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए उठाया गया है।

source : bharti news

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